व्यवस्था 22 (HCV)

1आप अपने इस्राएली भाई के किसी बैल अथवा भेड़ को भटकते देखकर उसकी उपेक्षा नहीं करेंगे. निश्चयतः आप उसे उसके स्वामी के घर पर छोड़ देंगे. 2यदि वह इस्राएली आपके निकट नहीं रहते, अथवा यदि आप उनसे परिचित नहीं हैं, तब आप उस पशु को अपने ही घर पर ले आएं और वह उस समय तक आपकी देखरेख में रहेगा, जब तक उसका स्वामी उसकी खोज करते हुए आपके घर तक न आ पहुंचें. तब आप उसे उन्हें लौटा देंगे. 3यही आप उनके गधे के साथ, उनके वस्त्र के साथ, उनकी किसी भी खोई हुई वस्तु के साथ करेंगे, जो आपको प्राप्‍त हो गई है. आप इनकी अनदेखी नहीं करेंगे.
4यदि आपके किसी स्वदेशी का गधा अथवा बैल मार्ग में गिर पड़ा है, तो आप उसकी उपेक्षा नहीं करेंगे. आपको उन्हें उठाकर खड़ा करने में सहायता करनी ही होगी.
5कोई भी स्त्री, पुरुष के वस्त्र धारण नहीं करेंगी और न ही कोई पुरुष, स्त्री के; क्योंकि जो कोई ऐसा करते हैं, यह यहोवाह, आपके परमेश्वर के लिए घृणित है.
6यदि आपको मार्ग में किसी वृक्ष में अथवा भूमि पर किसी पक्षी का घोंसला मिल जाए, जिसमें उसके चूज़े अथवा अंडे हों, और माता पक्षी उन चूज़ों अथवा अण्डों को सहेजे बैठी हो, 7आप उस माता पक्षी को उसके चूज़ों से अलग नहीं करेंगे, ताकि आपका भला हो और आपकी उम्र बहुत बढ़ जाए.
8जब आप नए घर का निर्माण करें, तो आप अपने लिए छत के लिए एक घेरा ज़रूर बनवाएं, जिससे कि आप खुद पर हत्या का दोष न ले आएं, यदि कोई छत से नीचे आ गिरें.
9अपने अंगूर के बगीचे में आप दो विभिन्‍न प्रकार के बीजों को नहीं बोएंगे, नहीं तो उन दोनों बीजों की समग्र उपज अपवित्र हो जाएगी.
10अपने हल में आप बैल और गधे को साथ साथ नहीं जोतेंगे.
11आप ऐसा वस्त्र धारण नहीं करेंगे, जो ऊन और सन के मिश्रण से तैयार किया गया है.
12आप अपने बाहरी वस्त्र के चारों कोनों पर फुन्दनों को बनाया करेंगे.
नैतिकता संबंधी विधान
13यदि कोई पुरुष विवाह करके पत्नी से शारीरिक संबंध स्थापित करने के बाद उन स्त्री को पसंद नहीं करते हैं, 14और इसके बाद उन पर निंदनीय कामों का आरोप लगाते हैं; यहां तक कि वह सार्वजनिक रूप से उन पर ये सारे लांछन भी लगाने लगते हैं, “मैंने इन स्त्री से विवाह किया परंतु संबंध के समय पर मुझे उनमें कुंवारीपन के कोई लक्षण प्राप्‍त न हुए.” 15तब कन्या के माता-पिता कन्या के कुंवारीपन का सबूत लेकर नगर प्रवेश पर नगर प्रधानों के सामने प्रस्तुत करेंगे. 16कन्या के पिता प्रधानों से कहेंगे, “मैंने इन पुरुष से अपनी पुत्री का विवाह किया, परंतु वह उन्हें अप्रिय लगने लगी हैं. 17यह भी देखिए कि वह हमारी पुत्री पर लज्जास्पद लांछन लगा रहे हैं! वह यहां तक घोषित कर रहे हैं कि मुझे आपकी पुत्री में कुंवारीपन का चिह्न प्राप्‍त नहीं हुआ.” परंतु यह देखिए: यह है हमारी पुत्री के कुंवारीपन का सबूत. माता-पिता उस वस्त्र को उन प्रधानों के सामने फैला देंगे, 18फिर नगर प्रधान उस व्यक्ति को प्रताड़ित करेंगे. 19वे उन पुरुष पर चांदी के एक सौ शेकेल का जुर्माना आरोपित करेंगे, जिसे लेकर वे उन कन्या के पिता को सौंप देंगे. कारण यह है कि उन पुरुष ने इस्राएल की उन कुंवारी कन्या को सार्वजनिक रूप से कलंकित किया है. वह आजीवन उनकी पत्नी रहेंगी, उनका तलाक कभी न होगा.
20परंतु यदि इसके विपरीत, उन पुरुष का यह आरोप सत्य साबित हो जाता है, वह कन्या कुंवारी नहीं थीं, 21तब वे उन कन्या को उनके पिता के घर के द्वार पर लाएंगे और उस नगर के पुरुष उन पर पथराव करके उन कन्या को मार डालेंगे, क्योंकि उन्होंने इस्राएल में यह अनाचार किया और अपने पिता के घर में ही वेश्यावृत्ति की है. यह करने के द्वारा आप अपने बीच से बुराई को दूर कर देंगे.
22यदि कोई पुरुष किन्हीं दूसरे व्यक्ति की पत्नी के साथ संबंध बनाते हुए पाए जाएं, तो दोनों ही मृत्यु दंड के योग्य हैं; वह पुरुष, जो उन स्त्री से संबंध बना रहे थे और वह स्त्री भी. उस प्रकार आप इस्राएल में से बुराई को दूर करेंगे.
23यदि किसी कुंवारी कन्या जिनकी सगाई हो चुकी है, उनसे कोई अन्य पुरुष नगर सीमा के भीतर ही संबंध बनाते हैं, 24तब आप उन दोनों को नगर फाटक से बाहर ले जाएंगे और दोनों ही को पथराव करके मार देंगे; कन्या का इसलिये कि उन्होंने नगर में होने पर भी सहायता की गुहार नहीं लगाई और पुरुष का इसलिये कि उन्होंने पड़ोसी की स्त्री का शीलभंग किया है. यह करके आप अपने बीच से अनिष्ट का बहिष्कार कर देंगे.
25परंतु इसके विपरीत यदि कोई पुरुष किसी विवाह के लिये वचनबद्ध जवान स्त्री को बाहर खेत में पाकर उनके साथ बलात्कार करते हैं, तो उन पुरुष को मृत्यु दंड दिया जाए. 26उस लड़की को कुछ न करना, क्योंकि उसने मृत्यु दंड के योग्य कोई पाप नहीं किया है. यह वैसा ही है जैसे कोई व्यक्ति घात लगाकर अपने पड़ोसी की हत्या कर दे. 27जब खेत में उन व्यक्ति ने उन अकेली कुंवारी कन्या को पाया, कन्या ने तो सहायता की गुहार लगाई थी, परंतु उनकी रक्षा के लिए वहां कोई भी नहीं थे.
28यदि कोई पुरुष ऐसी कुंवारी को पाते हैं, जिनकी सगाई नहीं हुई है, वह उन्हें पकड़कर उनसे संबंध बनाते हैं, और यह काम प्रकट हो जाता है, 29तब वह संबंध बनानेवाले व्यक्ति कन्या के पिता को चांदी के पचास शेकेल देंगे और वह कन्या उनकी पत्नी हो जाएंगी; क्योंकि उन पुरुष ने उनका शीलभंग किया है. वह आजीवन उनसे विवाह-विच्छेद नहीं कर सकेंगे.
30कोई भी पुरुष अपने पिता की पत्नी से विवाह नहीं करेंगे; कि वह ऐसा करने के द्वारा अपने पिता के प्रति लज्जा के कारण न हो जाएं.