व्यवस्था 7 (HCV)
मनोनीत राष्ट्र
1जब यहोवाह, आपके परमेश्वर आपको उस देश में प्रवेश करा देंगे, आप जिस देश पर अधिकार करने पर हैं और यहोवाह आपके परमेश्वर, आपके सामने से अमोरियों, कनानियों, हित्तियों, परिज्ज़ियों, हिव्वियों, यबूसियों तथा गिर्गाशियों जैसी अनेक जनसमुदायों को, जो आपसे अधिक मजबूत और गिनती में आपसे अधिक हैं, वहां से निष्कासित कर देंगे, 2और जब यहोवाह, आपके परमेश्वर, उन्हें आपको सौंपेंगे और आप उन्हें हरा देंगे, तब आप उन्हें पूरी तरह नाश कर दें. आप उनके साथ किसी भी प्रकार की वाचा स्थापित नहीं करेंगे, न उनके प्रति किसी प्रकार की सहानुभूति ही दिखाएंगे. 3इसके अलावा, आप उनके साथ वैवाहिक संबंध स्थापित नहीं करेंगे; न उनके पुत्र को अपनी पुत्री देंगे और न अपने पुत्र के लिए उनकी पुत्री को अपनाएंगे, 4क्योंकि वह आपके पुत्र को मेरा अनुसरण करने से भटका देंगी, कि आप पराए देवताओं की उपासना करने लगें. तब तो यहोवाह का क्रोध आप लोगों पर भड़क जाएगा, और वह बिना देरी के आपको नाश कर देंगे. 5उनके विषय में आप लोगों की नीति यह होगी: आप लोग उनकी वेदियां ध्वस्त कर दें, उनके लिए पवित्र उनके खंभों को तोड़ दें, उनके लिए पवित्र अशेराह खंभों को काट डालें, और उनकी मूर्तियों को भस्म कर दें. 6क्योंकि आप यहोवाह, आपके परमेश्वर के लिए अलग की गई पवित्र प्रजा हैं, यहोवाह आपके परमेश्वर ने आपको पृथ्वी के सारे राष्ट्रों में से अपनी निज प्रजा होने के लिया चुना है.
7यहोवाह ने आप लोगों को अपना प्रेम पात्र इसलिये नहीं बना लिया और आप लोगों को इसलिये नहीं चुन लिया, कि आप लोग अन्य राष्ट्रों की तुलना में गिनती में अधिक थे, वस्तुतः आप लोग तो सभी राष्ट्रों की तुलना में बहुत कम ही थे. 8परंतु यह इसलिये कि यहोवाह ने आप लोगों से प्रेम किया और अपनी उस प्रतिज्ञा को पूरी की, जो उन्होंने आप लोगों के पूर्वजों से शपथपूर्वक की थी. यहोवाह ने आप लोगों को अपनी समर्थ भुजा के द्वारा निकाला था, दासत्व के जीवन से मुक्त किया; मिस्र के राजा फ़रोह के बंधन से. 9तब आप यह समझ लीजिए, कि यहोवाह आपके परमेश्वर ही, परमेश्वर हैं. वह विश्वासयोग्य परमेश्वर हैं, वह सहस्र पीढ़ी तक अपनी वाचा और अपार प्रेम उन पर स्थायी रखते हैं, जो उनसे प्रेम करते और उनके आदेशों का पालन करते हैं. 10लेकिन,
वे उन लोगों को दंडित करने और उन्हें नष्ट करने में संकोच नहीं करेंगे,
जो उनसे घृणा करते हैं;
वे उन लोगों से विलंब न करते हुए मुह तोड़ बदला लेंगे,
जो उनसे नफ़रत करते हैं.
11फिर आज मैं आपको जैसा आदेश दे रहा हूं, आप उन आदेशों, नियमों और विधियों का पालन करेंगे.
12फिर इसका परिणाम यह होगा कि जब आपने इन विधियों के प्रति सावधानी रखी और उनका पालन करते रहे हैं, तो यहोवाह आपके परमेश्वर भी आपके साथ अपनी वाचा का पालन करेंगे, अपना अपार प्रेम आप पर बनाए रखेंगे, जैसे उन्होंने आपके पूर्वजों से प्रतिज्ञा की थी. 13यहोवाह, आपके परमेश्वर आपसे प्रेम करेंगे, आपको समृद्धि देंगे और आपकी गिनती में बढ़ौत्तरी करेंगे. वह आपके गर्भ के फल को, आपकी भूमि की उपज—आपके नए अंगूरों के रस और आपके जैतून के तेल—को आशीषित करेंगे. उस देश में जिसकी प्रतिज्ञा उन्होंने आपके पूर्वजों से की थी, आपके पशुओं में वृद्धि होती रहेगी और आपके भेड़-बकरियों के मेमनों में भी वृद्धि होगी. 14आप सभी राष्ट्रों की तुलना में अधिक आशीषित होवेंगे. आप में अथवा आपके पशुओं में कोई भी नर अथवा मादा बांझ न होंगी. 15यहोवाह आपके बीच से सभी रोगों को निरस्त कर देंगे. वह आप पर मिस्र देश की कोई भी भयंकर बीमारी हावी न होने देंगे, जिन्हें आपने मिस्र देश में देखी थी; परंतु वह इन रोगों को उन पर प्रभावी कर देंगे, जो आपसे घृणा करते हैं. 16आप उन सभी राष्ट्रों को अवश्य मिटा डालें, जिन्हें यहोवाह, आपके परमेश्वर आपको सौंपने पर हैं. आपकी आंखों में उनके प्रति ज़रा भी कृपा न आए और न आप उनके देवताओं की उपासना करें; क्योंकि यही आपके लिए फंदा हो जाएगा.
17यदि आपके मन में यह विचार आए, “ये जनसमुदाय तो हमसे अधिक मजबूत हैं. हम कैसे उन्हें यहां से निकालेंगे?” 18तो आप उनसे भयभीत न होवें. सही होगा कि आप यह याद करें कि यहोवाह, आपके परमेश्वर ने फ़रोह और सारे मिस्र के साथ क्या किया था. 19खुद आपके द्वारा देखी गईं वे भयानक विपत्तियां, वे चिन्ह, चमत्कार और मजबूत भुजा और बढ़ाए हुए हाथ, जिनके द्वारा यहोवाह, आपके परमेश्वर ने आपको निकाल लिया. यहोवाह आपके परमेश्वर उन सभी राष्ट्रों के साथ, जो आज आपके लिए भय का विषय हैं, वही सब करेंगे. 20इसके अलावा यहोवाह, आपके परमेश्वर उनका मन कच्चा कर देंगे, जिससे कि वे, जो बचे हैं और आपसे छिपे हुए हैं, नाश हो ही जाएंगे. 21आप उनसे भयभीत न होवें, क्योंकि यहोवाह, आपके परमेश्वर आपके बीच में हैं, वह, जो सर्वशक्तिमान और भय-योग्य परमेश्वर हैं. 22यहोवाह, आपके परमेश्वर आपके सामने से इन सारे जनसमुदायों को धीरे धीरे खदेड़ते चले जाएंगे. आपके लिए उन्हें शीघ्रतापूर्वक समाप्त करना असंभव होगा, क्योंकि उस स्थिति में वन्य पशुओं की गिनती बहुत बढ़ जाएगी. 23परंतु यहोवाह आपके परमेश्वर उन्हें आपको सौंपते जाएंगे और उनको बहुत व्याकुल कर देंगे, जिससे वे नाश हो जाएंगे. 24यहोवाह, आपके परमेश्वर, उनके राजाओं को आपके हाथों में सौंप देंगे, कि आप पृथ्वी पर से उनका अस्तित्व ही मिटा दें. कोई भी इस योग्य न पाए जाएंगे कि आपका सामना कर सकें और आप उन्हें नाश कर देंगे. 25आपको उनकी ढली हुई मूर्तियों को दाह करना होगा. आप उन मूर्तियों के चांदी और सोने का लालच न करें और न ही इन्हें अपने पास रखें, नहीं तो यह आपके लिए फंदा सिद्ध होगा, क्योंकि यह यहोवाह आपके परमेश्वर की दृष्टि में घृणित है. 26आप कोई भी घृणित वस्तु अपने घर में लेकर न आएं, नहीं तो आप खुद उसके समान ही विनाश के योग्य हो जाएंगे. आप इससे पूरी तरह घृणा करें, क्योंकि यह वह वस्तु है, जो अशुद्ध है.