आमोस 9 (HCV)

इस्राएल का नाश किया जाना
1मैंने प्रभु को वेदी के निकट खड़े देखा, और उन्होंने कहा:
“मीनारों के शिखरों को ऐसे मारिये
कि नीवें तक हिल जाएं.
उन्हें सब लोगों के सिरों पर गिराइए;
जो बच जाएंगे, उन्हें मैं तलवार से मार डालूंगा.
एक भी व्यक्ति भाग नहीं सकेंगे,
एक भी व्यक्ति बच न सकेंगे.
2चाहे वे खोदकर अधोलोक तक पहुंच जाएं,
मेरा हाथ उन्हें वहां से भी खींच लाएगा.
चाहे वे आकाश के ऊपर भी चढ़ जाएं,
मैं उन्हें वहां से भी नीचे ले आऊंगा.
3चाहे वे कर्मेल पर्वत के शिखर पर जा छिपें,
मैं उन्हें वहां भी ढूंढ़कर पकड़ लूंगा.
चाहे वे मेरी दृष्‍टि से समुद्र के तल में छिप जाएं,
वहां मैं सर्प को उन्हें डसने की आज्ञा दूंगा.
4चाहे उनके शत्रु उन्हें बंधुआई में ले जाएं,
वहां मैं आज्ञा देकर उन्हें तलवार से मरवा डालूंगा.
“मैं उनकी भलाई के लिये नहीं
पर उनकी हानि के लिये उन पर नजर रखूंगा.”
5प्रभु, सर्वशक्तिमान यहोवाह,
वे पृथ्वी को छूते हैं और वह पिघल जाती है,
और उसमें रहनेवाले सब विलाप करते हैं;
पूरी भूमि नील नदी के समान ऊपर उठती है,
और फिर मिस्र देश की नदी के समान नीचे बैठ जाती है;
6वे आकाश में अपना ऊंचा महल बनाते हैं
और उसकी नींव पृथ्वी पर रखते हैं;
वे समुद्र के पानी को बुलाते हैं
और भूमि पर वर्षा करते हैं—
यहोवाह है उनका नाम.
7“क्या आप इस्राएली मेरे लिये
कूश वासियों के समान नहीं हैं?”
यहोवाह की यह घोषणा है.
“क्या मैं इस्राएलियों को मिस्र देश से,
फिलिस्तीनियों को काफ़तोर9:7 काफ़तोर अर्थात्, क्रेते देश से
और सीरियावासियों को कीर देश से बाहर निकालकर नहीं लाया?
8“निश्चित रूप से परम प्रभु की आंखें
पापमय राज्य पर लगी हुई हैं.
मैं धरती पर से
इसे नाश कर दूंगा.
तौभी, मैं याकोब के वंश को
पूरी तरह नाश नहीं करूंगा,”
यहोवाह की यह घोषणा है.
9“क्योंकि मैं आज्ञा दूंगा,
और मैं इस्राएल के लोगों को
सब जनसमूहों के बीच ऐसे हिलाऊंगा,
जैसे किसी चलनी में अनाज को हिलाया जाता है,
और भूमि पर एक भी कंकड़ नहीं गिरता.
10मेरे लोगों के बीच में जो पापी हैं,
वे सब जो यह कहते हैं,
‘न तो विपत्ति हमारे ऊपर आएगी और न ही विपत्ति से हमारा सामना होगा,’
वे सबके सब तलवार से मारे जाएंगे.
इस्राएल की वापसी
11“उस समय,
“मैं दाविद के गिरे हुए शरणस्थान का पुनर्निमाण करूंगा,
मैं इसके टूटे दीवारों को ठीक करूंगा,
इसके खंडहरों को ठीक करूंगा,
और इसको पहले जैसा फिर से बना दूंगा,
12ताकि वे एदोम के बचे लोगों को
और उन सब जनसमूह के लोगों को अपने अधीन कर लें,
जो मेरा नाम लेते हैं,”
यह उन्हीं यहोवाह की घोषणा है, जो यह सब करने पर हैं.
13यह यहोवाह का कहना है, “ऐसे दिन आ रहे हैं,
“जब हल चलानेवाले व्यक्ति फसल काटनेवाले से,
और अंगूर को रौंदने वाले व्यक्ति पौधे रोपनेवाले से आगे निकल जाएंगे.
नए अंगूर का मधु पर्वतों से टपकने लगेगा
और सब पहाड़ियों से होकर बह जाएगा,
14और मैं अपने इस्राएली लोगों को बंधुआई से वापस ले आऊंगा.
“वे नष्ट हुए नगरों का पुनर्निर्माण करेंगे और उनमें रहने लगेंगे.
वे अंगूर की बारियां लगाएंगे और उनका दाखमधु पिएंगे;
वे बगीचे लगाएंगे और उनके फलों को खाएंगे.
15मैं इस्राएल को उन्हीं के देश में स्थापित करूंगा,
और वे उस देश से फिर कभी निकाले नहीं जाएंगे
जिसे मैंने उन्हें दिया है,”
यह आप लोगों के परमेश्वर यहोवाह का कहना है.